लिट्टी – चोखा और बारिश

 

लिट्टी – चोखा और बारिश

 

“उफ्फ! ये गरमी…!” बाबू जी गरमी से परेशान होकर मां को बोले, “पता नहीं कब बारिश होगी और कब इस गर्मी से निजात मिलेगी।”

मां बोली, “चारों और उमस हो रहा है और बादल भी छा रहे हैं, शायद बारिश आने वाली है।”

ये उमस बारिश के पहले की उमस थी। अचानक से बारिश की बूँदें धरती पर गिरने लगी। टिप…टिप..!! सब लोग ने गर्मी से राहत की सांस ली ।

बाबूजी को कुछ गरम खाने की इच्छा हुई, और उन्होंने ने अपनी बहु रीना को आवाज़ दिया। “बहू, आज तो लिट्टी-चोखा खाने का मौसम है।”

रीना बालकनी से जल्दी-जल्दी कपड़े हटा रही थी की कहीं बारिश के कारण सूखे कपडे गिले ना हो जाये। आकर बोली, “जी बाबू जी, मैं अभी जाकर लिट्टी-चोखा की तयारी करती हूं।”

इतने में रीना के पति नरेन् भी कार्यlलय से घर आ गए। आकर बोले, “रीना, मेरे लिए एक कप चाय बना दो, प्लीज।” बोलते हुए नरेन रूम में चले गए। बाबू जी ने चिल्लाते हुए कहा, “नरेन् आज लिट्टी-चोखा बन रहा हैं ।” नरेन् ने उत्साहित होकर जवाब दिया, “वाह, क्या बात हैं।”

थोड़ी में नरेन भी ड्राइंग रूम में आकर और सबके साथ बैठ कर पीने लगे। चाय की खुशबू के साथ साथ बारिश के कारन मिट्टी से आने वाली सोंधी खुशबू भी उन लोगों को अच्छी लगी रही थी। उसके बाद रीना ने किचन में जाकर लिट्टी- चोखा बनाना शुरू कर दिया । गरम गरम लिट्टी की खुशबू ने सबको टेबल पर आने के लिए बाध्य कर दिया । सब बेसब्री से इंतज़ार कर रहें थे, कुछ ही देर में रीना लिट्टी और चोखा ले कर आ गयीं। सबने एक साथ चिल्लाकर लिट्टी और चोखा का स्वागत किया।

बाबू जी ने कहा, “वाह बहू, आज की लिट्टी-चोखा की बात ही अलग है।”

रीना बोली, “नहीं बाबू जी, लिट्टी चोखा तो पहले की तरह बनी है लेकिन आज बारिश ने लिट्टी-चोखा को और स्वादिष्ट कर दिया है।”

और सब लिट्टी-चोखा के स्वाद में खो गयें । बारिश भी तेज़ हो गयीं थी।

 

नम्रता गुप्ता

 

 

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