कुछ खास हैं आम

 

कुछ खास हैं आम

आम और गर्मी के मौसम का मेल ऐसा लगता है जैसे सुई और धागे का.आम अपनी मिठास और रसीले स्वाद तथा साथ ही साथ स से जुड़े लाभ के कारण फलो का राजा माना जाता है।

जब मैं छोटी थी तब गर्मी के मौसम का बेसब्री से इंतज़ार करती थी ,इसका एकमात्र कारण था -आम। शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसे आम नहीं पसंद हो । अल्फांसो लंगड़ा दसहरी बीजू बंगनपालि केसर सुंदरी , आम के हज़ारों क़िस्म हैं। गर्मी आते ही मार्किट सज जाता हैं आमों से। आम के मौसम को एक उत्सव के रूप में भी मनाया जा सकता है क्यूंकि जब आम का मौसम आता हैं, तो एक अलग ही माहौल बन जाता है। घर के सभी बड़े बूढ़े आम का बड़े चाव से स्वाद लेने लगते है । घर के लोग इकट्ठे बैठकर आम खाते है । वे सभी लोग जो आम के मौसम के पहले डाइटिंग करते थे वो डाइटिंग को भी भूल जाते है। कुछ लोग आम का शेक बनाते है तो कुछ आम को यू ही खाते है।

आम के आचार को भी अलग अलग तरीकों से बनाया जाता है। आम का आचार कई सालो तक ताजा रहता है इसलिए मेरी माँ बड़ी मात्रा में आचार बनाती है। इस प्रकार मुझे साल भर आम का आचार खाने का आनंद मिलता है।

आम स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी बहुत उपयोगी है। आम पोषक तत्वों से भरपूर होती है आम में विटामिन c होता है जो हमारी त्वचा को इसकी इलास्टिसिटी देता है, यह विटामिन A भी देता है जो बालों के लिए अच्छा है।

आम एक ऐसा फल हैं जो आम जनता का भी प्रिय हैं तो राजाओं का भी खास रहा हैं।

मुगलों का फलों के राजा से अनोखा प्रेम संबंध था। उनमें से पहला, बाबर, फ़ारसी के सभी खाद्य पदार्थों के प्रति अपने अटूट प्रेम के कारण, आम के बारे में ज़्यादा नहीं सोचता था, हालाँकि उसने स्वीकार किया था कि यह हिंदुस्तान में उपलब्ध सबसे अच्छा फल हो सकता है ।

आइन-ए-अकबरी में, अबुल फज़ल ने फल का विस्तृत विवरण दिया है, जिसमें कहा गया है कि “आम रंग, गंध और स्वाद में बेजोड़ है।” यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि अकबर ने बिहार के दरभंगा क्षेत्र में एक बाग बनाने का आदेश दिया जिसमें एक लाख पेड़ थे, जिसे लक्खी बाग कहा जाता था।

जहांगीर – सभी हिंदुस्तानी – ने घोषणा की, “काबुल के फलों की मिठास के बावजूद, उनमें से एक में भी, मेरी राय में, आम का स्वाद नहीं है।” नूरजहाँ ने यह सुनिश्चित किया कि उसके पति को गुलाब और आम के साथ मिश्रित शराब की नियमित आपूर्ति मिले, जिसे वह कोंकण क्षेत्र से खरीदती थी।

शाहजहाँ को फल इतना पसंद था कि जब औरंगजेब ने उसे गिरफ़्तार कर लिया तो जिस चीज़ से उसे वंचित कर दिया गया, वह थी उसका पसंदीदा फल तक पहुँचना। विडंबना यह है कि माना जाता है कि यह वही आम था, जिसके बारे में माना जाता है कि औरंगजेब ने सिंहासन की लड़ाई में उसका समर्थन करने के लिए फारस के शाह अब्बास को भेजा था। मुगलों का इस फल से आनंद आम पन्ना, आम का लौज़ और आम का मीठा पुलाव जैसे नए व्यंजनों में शामिल करने तक बढ़ा।

बहादुर शाह जफर के समय में भी आम ने अपनी श्रेष्ठता बरकरार रखी। कहा जाता है कि उन्हें वह फल बहुत पसंद था जो पेंटिंग, क्रॉकरी, त्योहारों और यहां तक ​​कि इफ्तार पार्टियों में भी प्रमुखता से दिखाई देता था। कहा जाता है कि अपने पूर्वजों की बहुत सारी भव्यता से वंचित, अंतिम मुगल को कवियों और उनके पसंदीदा आमों के बीच सांत्वना मिली थी।

तो बस अब, गर्मी के जाते हीं, आम का स्वाद मुह में लिए, अगले गर्मी का इंतज़ार शुरू हो जाता हैं।

 

नम्रता गुप्ता

 

 

5
(1)

Author

Click on a star to rate it!

Average rating 5 / 5. Vote count: 1

No votes so far! Be the first to rate this post.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *