Entries for Poetry Challenge #2

Entries for Poetry Challenge #2

 

1. पता नहीं

आरंभ से अंत में,
कभी मिलता कुछ भी नहीं,
मिल भी जाए जो कभी,
ठहरता तो कभी कुछ भी नहीं।

उसी रास्ते जाते थे ना स्कूल हम,
बदल गया वो रास्ता कितना ये पता नहीं,
यार भी कई हैं मेरे,
बस कहां हैं वो सारे ये पता नहीं।

घर से हूं निकलती मां कहती हैं,
खाते-पीते रहना, आज खाया नहीं मैंने,
मां को मेरी ये पता नहीं,
आशीर्वाद तो है साथ बड़ो का,
वो रहेंगे साथ कब तक ये पता,

सफर तो चल ही रहा है,
कबसे ये पता नही,
निकले तो थे आज घर से,
वापस आयेंगे कब ये पता नहीं।

वैष्णवी सिंह

 


2. मंजिल 

 

आज मैं अपने रास्ते जब जा रहा था

दूर देखता रह गया ईश्वर का वास्ता

एसा नीला अंबर वो सफेद पर्वत 

हरी हरी चादर ओढे धरती मुस्कुराती 

बाँहें फैलाकर मुझे बुलाती

“आ समा जा मुझमें ” एसा मुझसे कहतीं

बस अकेला चलता गया देख ऐसी खूबसूरती

कि पता ही न चला कब मैं कवी बन गया

और सुनाता ही गया तेरे इस नक्काशी को।

 

मंजिल तो मुझे पानी ही थी

तेरा जो ये साथ मिला मैं बस चढता ही गया

सफलता की सीढियां

बिना किसी शिकायत के

ऐसी लंबी डगर मैं चला

तेरे इस खूबसूरत सहारे से

मुझे क्या क्या न पाने को मिला।

 

पदमा गायत्री

 


3. मंजिल

 

ये धरती ये अंबर ,

ये रंगीन नज़ारा ,

है ऊंची अडिग हैं ,

ये पर्वत की चोटी ,

मुझसे ये कहती बड़ी दूर मंजिल ,

 

ये लंबा सा रास्ता ,

हरे पेड़ लंबे ,

कहती॔ हैं मुझसे ,

सफर दूर का है,

 

पलकें झुकाके मगर मैंने सोचा ,

ये नील आकाश ये लंबा रास्ता ,

और तो ये पर्वत की लंबी चिटारी ,

सब तो क्षितिज से बंधे ही तो हैं !!

 

कदम से कदम हम मिलाकर चले ,

झुकेगा वह अंबर ,

छू लेगी ज़मीन ,

गुम हो जाएगा तू सफलता की वादियों में ,

 

फूलों कि शैय्या में जीवन बितेगा ,

खुला है गगन ,

खुला रास्ता है ,

जा जाके मिल ,

जीत ले अपनी मंजिल   ।।

 

कल्याणी


 

4. The road ahead…

The drift was there, slow and steady
Dark clouds gave way
To a listless bleak evening.

Could we freeze the perpetual flow of time
Hit pause button may be,
Lock those fervent moments, for time immemorial!

The roads we walked, the closest we stood
The cracks that crept in stealthily
Love that slipped lucidly
Were we ready to lose
What we could never have!

The road ahead ,dead and deserted
Few twists and drifts later,
Together would we tread !
Deadly curves , unlimited speed
Yet closest would we meet!

Like floating clouds, would we merge
And prittle prattle as much!

 

Soma Bhattacharjee


 

5. मैं मुसाफिर हूँ, मुझे सफर में मजा आता है।

 

इन खूबसूरत वादियों पर
नजरें ठहर जाती हैं
ये नीला आसमान
बा़हें खोल के बुलाता है ।

मंजिल पे पहुंच के तो
कदम रुक जाते हैं
मैं मुसाफिर हूँ,
मुझे सफर में मजा आता है ।

सफर में जुड़ती हैं
कुछ खट्टी मीठी यादें
सफर में है जिंदगी,
खुद जिंदगी भी है एक सफर
कट जाता है ,हंसते गाते
गर साथ हो प्यारा कोई हमसफर

हर राह ढूँढती हैं नजरें तुझे
जाना कहीं भी हो मुझे
क्यों हर रास्ता,
तेरी गली से गुजर कर आता है

मीलों का सफर बाकी है
मगर जाने क्यों
भटक कर मजा आता है
मैं मुसाफिर हूँ ,
मुझे सफर में मजा आता है ।

 

मीनू यतिन

 


 

6. सबसे बड़ा कौन है?  WINNER

 

एक होड़ लगी कि

सबसे बड़ा कौन है?

पेड़ पौधे, पर्वत पहाड़,

या उनके ऊपर

फैला नभ, जो मौन है।

सबसे बड़ा कौन है?

 

मिट्टी से निकलकर, सभी आते है,

मिट्टी में ही आखिर, मिल जाते है।

कोई कुछ मास, कोई कुछ बरस,

कोई युगों तक जीते हैं।

पर अमृत सब इसी धरा का पीते हैं।

फिर यह स्पर्धा क्यूं, कौन बड़ा कौन गौण है?

सबसे बड़ा कौन है?

 

माना जमीन से ऊंचे पठार है,

पठार से ऊंचे पर्वत।

पर्वत से ऊंचे, आकाश,

उनसे ऊंचा सूर्यप्रकाश।

गणित से तो यह प्रश्न हल हो जाता है,

पर सही उत्तर अभी भी मौन है।

सबसे बड़ा कौन है?

 

इंसान,

इंसान है, जो शिखरों का दंभ तोड़ देता है,

नदियों का मुख मोड देता है,

जो परबत पठारों पर चढ़ जाता है,

उनका सीना फाड़ कर,

नए रस्ते बनाता है,

वह ही, जो नभ से परे भी विचरता है।

दूसरे ग्रहों पर, पग रखता है।

 

जिसमें इस रस्ते सी सरलता हो,

इन पहाड़ों सा अदम्य साहस हो,

नभ सी विशालता हो,

सबसे बड़ा वह है,

बाकी सब गौण है।

 

दिनेश कुमार सिंह

 


 

7. नई राह

 

ना किसी की अधूरी तमन्नाओं में शामिल

ना किसी और के किये गुनाह की माफी हूं । 

अब परवाह नहीं करती लोगों की

कोई और क्यों मेरे लिए मैं ही काफी हूं ।

 

जो तुम साथ ना चलो तो भी ठीक ही है 

मेरे खयाल में अकेले चल देना भी कुछ गलत नहीं है

क्यों किसी की याद में दिल को जलाएं,

जो साथ निभाए बस समझो अपना वही है। 

 

किसी की जिम्मेदारी बन बोझ नहीं मैं,

अपना रास्ता खुद तय करने का हौसला रखती हूँ।

सही गलत और दकियानूसी सोच से परे,

समाज के दुहाई देने वालों से फासला रखती हूँ।

 

कोई क्या कहेगा क्या सोचेगा 

इन सब बातों की नहीं करती परवाह ।

थोड़ी सी बेखौफ हो गई हूँ एक अरसे से,

थोड़ी बेबाक और थोड़ी सी लापरवाह ।

 

सब की सुनती हूं पर अपनी ही करती हूं 

हमेशा दिमाग की सुनना भी तो दिल के साथ गद्दारी है।

थोड़ा स्वार्थी होकर कभी खुद से रूबरू हुआ जाए,

बहुत जी लिया औरों के लिए कहो अबकी मेरी बारी है।

 

आरती

 


8. Memories!

 

Watching the horizon turning indigo

On the lonely road I go,

The flowers are blooming,

And the mountains are calling,

But I don't know why I am stalling.

 

It takes me down the memory lane,

Of the fun and amazing time we had here,

But now it brings me only pain,

Since those days won't come back again.

 

Priorities tend to change,

But people remain the same,

I dont know how our friendship got caught 

in the middle of this tragic time frame.

 

This road brings back all my memories,

But, alas! Now nothing is left.

And it only brings tears and agonies.

 

Apoorva Goyal

 

 


 

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