बेवफा जिंदगी

बेवफा जिंदगी

“मम्मी, पापा नानी जी को स्टेशन से ले कर आ गए है , जल्दी बाहर आओ…..”
“अरे माँ! आप आ गयी , आइए , अंदर आइए।” भावना ने बड़े प्यार के साथ अपनी माँ के हाथ को पकड़ते हुए घर के अंदर बुलाया तब तक गाड़ी पार्क कर आकाश भी ऊपर आ चुके थे। नानी के आने से सुनैना और सुजल की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था।

“ट्रैन लेट थी क्या?” भावना ने जिज्ञासावश आकाश से पूछा।
“२ घंटे लेट थी ” आकाश ने उत्तर दिया।
“माँ बहुत बीमार लग रही आप?” भावना ने चाय का कप बढ़ाते हुए अपनी माँ से बोला।
“नहीं बेटा… सफर से आयी हूँ न, इसलिए थकान के कारण ऐसा लग रहा है” माँ ने उत्तर दिया।
“ठीक है माँ, आप चाय पीकर फ्रेश हो जाइए मैं फटाफट खाना लगाती हूँ।” भावना ख़ुशी से झूमते हुए रसोईघर के अंदर चली गयी।

थोड़ी देर के बाद सभी लोग खाने के टेबल पर बैठ कर खाना खाने लगे। खाना खाने के बाद माँ आराम करने लगी। सफर की थकान भी थी।

भावना माँ के पास जाकर बैठती है और पूछती है-” माँ, घर में पापा, भैया और भाभी सभी लोग कैसे है?
“सब ठीक है बेटा”, माँ ने मुस्कुराते हुए उतर दिया। “तेरे पिताजी को भी आने का बहुत मन था पर काम की व्यस्तता के कारण आ नहीं पाए। पर कोई बात नहीं, सुनैना और सुजल की परीक्षा के बाद तू तो मेरे साथ जाने ही वाली है, मिल लेना अपने पिताजी और भैया – भाभी से” |
“हाँ माँ” बोलते हुए भावना अपनी माँ के गले लग जाती है, “माँ अभी आप थोडा आराम कर लीजिये , शाम को आकाश हम बाहर घुमाने लेकर जाने वाले है”, भावना ने माँ से कहा।
“ठीक है बेटा”, बोलते हुए माँ भी लेट गयी।

शाम हो चुकी थी, सुनैना और सुजल अपनी नानी को जगाने लगे, “नानी जी उठिए , चलिए, तैयार हो जाइये … अभी हम लोग घुमने जाने वाले है।”
नानी भी मुस्कुराते हुए दोनों बच्चो को गले लगा लेती है | सभी लोग तैयार हो कर गाड़ी से घुमने के लिए निकल पड़ते है, ख़ुशी का माहौल था, सभी लोग बहुत खुश नजर आ रहे थे , धीमे आवाज़ में गाड़ी मे संगीत बज रहा था पर थोड़ी दूर जाकर ही आकाश की तबियत अचानक ख़राब होने लगती है , वह असहज महसूस करने लगता है, उसका पूरा चेहरा पसीने से भीग चूका था | वह बीच सड़क मे ही गाड़ी रोक देता है , और स्टीयरिंग पे हे गिर पड़ता है।

“आकाश—-” भावना चीख पड़ती है , “क्या हुआ आपको?”

माँ और दोनों बच्चे भी घबरा जातें है, बीच सड़क पर गाड़ी खड़ी होने के कारण ट्रैफिक जैम हो गया, पीछे से गाड़ी वाले हॉर्न पे हॉर्न बजाये जा रहे थे। भावना जल्दी से आकाश को पीछे लेटाती है और खुद ड्राइविंग सीट पर आ कर ड्राइव करने लगती है और गाड़ी को तेज भागकर हॉस्पिटल की ओर बढ़ती है।

भावना हॉस्पिटल पहुँच कर स्ट्रेचर मे आकाश को लेटा कर डॉक्टर के तरफ भागती है।
“डॉक्टर साहब , प्लीज जल्दी देखिये न, न जाने मेरे पति को अचानक क्या हो गया और ये बेहोश हो गए”
डॉक्टर जल्दी ही आकाश की नब्ज़ चेक करने लगते है। “ओह ,आई ऍम सॉरी , आप लोगों ने आने मे लेट कर दी , शायद इन्हें कार्डियक (कार्डियक) अरेस्ट आया था, डॉक्टर सहानुभूति पूर्ण बोलते हुए आगे बढ़ जाते है |
भावना चीख पड़ती है, “नहीं…. ऐसा नहीं हो सकता , आकाश, प्लीज उठ जाओ… चलो , माँ और बच्चो को घुमाने ले कर चलो प्लीज आकाश, उठ भी जाओ।”

माँ भी बेतहाशा रो रही थी और दोनों बच्चें रो-रोकर बुरा हाल था | हॉस्पिटल मे लोग उन लोगो को सांत्वना दे रहे थे।
माँ केवल अपनी बेटी की तरफ रोती हुई निगाहों से देखते जा रही थी, वो अपनी बिलखती बेटी को देख यही सोच रही थी की पल भर में ये सब क्या हो गया | सब कुछ ख़तम हो गया | दोनों बच्चे जो थोड़ी देर पहले ख़ुशी से उछल रहे थे अब आँखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे | बेबस, बूढी माँ किसी तरह बेटी को चुप कराने की कोशिश कर रही है और साथ ही अपने परिवार मे फ़ोन के द्वारा इस आकास्मिक घटना की सुचना भी दे रही है।
माँ बार – बार यह सोचते जा रही है की अचानक से ये सब क्या हो गया , ज़िन्दगी का कोई भरोसा नहीं , पल भर मे ही क्या से क्या हो जाता है।
बूढी माँ , बेटी और दोनों बच्चों के विलाप से आस-पास के लोगों की भी आँखें भर आई ….

पास ही खड़े किसी व्यक्ति ने दर्द भरे, दबे स्वर मे कहा –

“मौत ने चुपके से न जाने क्या कहा
और जिंदगी खामोश हो कर रह गयी”

 

नम्रता गुप्ता

 

 

 

 

 

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