Winner of Poetry Challenge #1 announced

 

Results for Poetry Challenge #1 

 

Dear Readers and Authors, Participants,

Thanks for the wonderful response to our first Poetry Challenge, The challenge is won by 'Meenu Yatin'

Meenu, Heartiest Congratulations! Keep Writing such Beautiful poems.

 

TANGY

 

 

Closed – Poetry Challenge #1

 

 

 

WINNER's Poem 

 

सोचा, के समंदर तुझसे मिलते चलते हैं।

 

सुना है ,तूफान कहीं तुझमें पलते हैं
सोचा, के समदंर तुझसे मिलते चलते हैं
किनारे पे बैठ कर ख्याल क्या बुनें
लहरों के आने जाने की क्या गिनतियाँ करें

बस यही सोच के ऐ दोस्त ,तुझमें उतरते हैं
सोचा के समंदर तुझसे मिलते चलते हैं ।

तेरा मन कभी भर आए तो उछाल देता है
न जाने कितनी चीजों को तू पनाह देता है
देखें भला क्या है छिपा तेरे अंदर

क्यों जहाँ तेरी गहराई की मिसाल देता है
नाप लूँ तेरी गहराई ,
जान लूँ तुझे समंदर
तेरी मौजों के हवाले खुद को करते हैं

बस यही सोच के ऐ दोस्त तुझमें उतरते हैं
सोचा, के समंदर तुझसे मिलते चलते हैं ।

मुझे अपने आगोश में ले रही हैं
तेरी लहरें मेरे संग खेल रही हैं
बहुत खूबसूरत है
तेरे भीतर की दुनिया
जहाँ तक जाती हैं नजरें तू ही तू है
तू बेहद है मगर तेरी भी हद है
तू जोड़ता है, और बाँटता है,
मुल्कों को
तू खुद भी राह है ,
जमीन की सरहद है
बस यही सोच के ऐ दोस्त तुझमें उतरते हैं
सोचा, के समंदर तुझसे मिलते चलते हैं।

सोचा, के समंदर तुझसे मिलते चलते हैं।

 

मीनू यतिन

 

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6 Responses

  1. Sweta says:

    Beautiful

  2. Anonymous says:

    Beautiful poem

  3. Aparna says:

    Congratulations beautiful

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